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सकारात्मक सोच : 2 सेल्समेन की कहानी

सकारात्मक सोच : 2 सेल्समेन की कहानी 

               कोरोना संकट का प्रकोप हर दिन बढ़ता जा रहा है ! विश्व  साथ साथ भारत की अर्थवयवस्था भी चरमरा रही है ! बड़े उद्योगपति से लेकर दिहाड़ी मज़दूर तक अपने आने वाले भविष्य को लेकर निश्चित नहीं है ! मैं आप से एक छोटी सी कहानी साझा करता हूँ , शायद आपके लिए उपयोगी हो और आपके जीवन में सकारत्मक बदलाव ला सके !

                                      कहानी कुछ इस तरह से है, कई वर्षों पहले यूरोप के  किसी देश में एक प्रसिद्ध जूता बनाने वाली कंपनी थी ! कंपनी का जब स्थानीय  बिज़नेस जब कम होने लगा तो, कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर ने एक्सपोर्ट मार्किट तलाशने की कोशिश की और इसके लिए अफ्रीका के मार्केट  का चुनाव किया ! अफ्रीका में जूतों का क्या मार्केट हो सकता है इसका पता लगाने के लिए मैनेजिंग डायरेक्टर ने अपने एक सेल्समेन को अफ्रीका के नाइजीरिया देश में भेजा ! सेल्समेन नाइजीरिया पहुँचता  है , अगले दो -तीन दिनों तक आसपास के कुछ गाँवो और शहरों का दौरा करने के बाद , हताश और निराश होकर वो अपने   मैनेजिंग डायरेक्टर को टेलीग्राम करता है की “इस देश  में कोई भी व्यक्ति जूता नहीं पहनता है, इसलिए जूतों के बिज़नेस की कोई संभावना नहीं है ! मैं वापस यहाँ से निकल रहा हूँ !” पहला सेल्समेन वापस यूरोप पहुँचता है और मैनेजिंग डायरेक्टर को बताता है अफ्रीका में जूतों के मार्केट को तलाशने का कोई औचित्य नहीं ,है  केवल धन और समय की  बर्बादी है ! मैनेजिंग  डायरेक्टर पहले सेल्समेन के नतीजों से संतुष्ट नहीं था उसने इस बार दूसरे सेल्समेन को नाइजीरिया जाकर वहाँ के मार्केट रिसर्च करने की जिम्मेदारी दी !

                      दूसरा सेल्समेन नाइजीरिया पहुँचता है, अगले दो तीन दिनों तक गॉँवो और शहरों का दौरा करने के बाद बहुत ख़ुशी और उत्साह से अपने मैनेजिंग डायरेक्टर को टेलीग्राम  करता है की ” इस देश में कोई भी व्यक्ति जूता नहीं पहनता हैं, इसलिए जूतों के बिज़नेस की बहुत बड़ी संभावना है, पूरा देश अपना बहुत बड़ा मार्केट है और कोई प्रतिद्वंद्वी (Competition) भी नहीं है, जूते के 2  कंटेनर भेज दीजिये,मैं  यही रहूँगा और  बिज़नेस का विस्तार करूँगा !”

     

   दोनों सेल्समेन के लिए प्रॉब्लम एक ही थी ,लेकिन दोनों के सोचने का नजरिया अलग अलग था ! एक के लिए  बिज़नेस की बहुत बड़ी सम्भावना थी , एक के लिए बिज़नेस की कोई उम्मीद नहीं थी ! एक के लिए  ग्लास आधा भरा था, एक के लिए ग्लास आधा ख़ाली था , एक की सोच नकारात्मक थी , एक की सोच सकारत्मक थी !

              बिज़नेस करना हमेशा से ही ,जोखिम भरा और चुनौतीपूर्ण रहा है और कोरोना की वजह से अनिश्चितता और चुनौतियां कई गुना बढ़ गयी है ! इस समय जरूरत है अपने नज़रिये को बदलने की , आउट ऑफ़ बॉक्स सोचने की ,नयी संभावनाओं की तलाश करने की,  बिज़नेस में टेक्नोलॉजी के प्रभावी  रूप से समावेश करने की,  बिज़नेस रणनीति को समय के अनुसार बदलने की,  बिज़नेस में खर्चों को नियंत्रण में रखने का और सबसे महत्वपूर्ण हे , सकारत्मक सोच ( Positive Attitude ) का !

                   मैनेजमेंट की  कक्षा में शिक्षक ने छात्रों से   पूछा  की ज़िन्दगी में सफलता ( Success ) का सबसे बड़ा क्या राज है ? एक छात्र ने कहा कठिन परिश्रम ( Hard Work ), दूसरे छात्र  ने कहा, भाग्य ( Luck ), तीसरे  छात्र ने कहा ,अनुभव ( Experience ), चौथे  ने कहा, ज्ञान ( Knowledge ), पांचवे ने कहा नेतृत्व क्षमता ( Leadership ), छटे ने कहा ईमानदारी ( Honesty ), अलग  अलग  छात्रों ने  अपने अनुभव के हिसाब से  अपने विचार रखे !

           

                                   

 शिक्षक ने सबकी बात  सुनी और कहा ” आप सबके जवाब सही है और सफलता पाने के लिए  इन सभी गुणों का होना आवश्यक है , दृष्टिकोण ( Attitude )” उन्होंने बताया अगर अंग्रेजी के A से Z को  1 से 26 नंबर इस तरह से दें  :

A B C D E F G H I J K L M N O P Q R S T U V W X Y Z 

equal to

1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 

Hard Work ?
H+A+R+D+W+O+ R+K
8+1+18+4+23+ 15+18+11 = 98% 

Knowledge ?
K+N+O+W+L+E+ D+G+E
11+14+15+23+ 12+5+4+7+ 5 = 96%

Luck ?
L+U+C+K
12+21+3+11 = 47%

Leadership ? …
L+E+A+D+E+R+ S+H+I+P
12+5+1+4+5+18+ 19+9+16 = 89%

ATTITUDE
A+T+T+I+T+U+ D+E

1+20+20+9+20+ 21+4+5 = 100% 
It is OUR ATTITUDE towards Life and Work that makes OUR Life 100% ! ! !

मैनेजमेंट मंत्रा :
“नज़र  को  बदलो तो  नज़ारे बदल जाते है , सोच को बदलो तो सितारें बदल जाते है !
कश्तियाँ बदलने की ज़रुरत नहीं , दिशा को बदलो किनारे खुद ब  खुद बदल जाते है !”

Nitesh Kataria,  is a writer, Motivational Speaker, Blog Writer and Marketing Professional based in Pune and  can be reached  at 9822912811  or  niteshk3@yahoo.com.




कोविड -19 के बाद बिज़नेस में संभावनाएं ..

कोविड -19 के बाद बिज़नेस में संभावनाएं ..
         कोरोना संकट बरकरार है , विश्व  के 200  से अधिक देशों  में  अभी तक 1. 85  लाख लोगो की मृत्यु हो चुकी है और लगभग  30  लाख  लोग इस महामारी से   प्रभावित  है ! भारत  ही नही विश्व की अर्थव्यवस्था सदी के सबसे नाजुक़  दौर से गुज़र रही है। विश्व के कई विकसित देश जैसे अमेरिका , इटली, स्पेन,फ्रांस,इंग्लैंड , जर्मनी भी इस महामारी पर काबू पाने में अपने आप को असहाय महसूस कर रहे है ! भारत में भी पिछले 1 महीने से लॉकडाउन  की स्थिति बनी हुई है और आगे भी इसके जारी रहने की संभावना है !
       आशंकाओ और अनिश्चितताओं  के बीच मे व्यापार- व्यवसाय और नौकरियों  के भविष्य के बारे मे असमंजस की स्थिति बनी  हुई  है । कोरोना वायरस  की वजह से  उड्डयन  ( Aviation ), मनोरंजन ( Multiplexes & Amusement Parks ), ट्रांसपोर्ट  ( Transport ), पर्यटन ( Tourism ) ऑटोमोबाइल ( Car & Truck ), ऑटो कंपोनेंट्स  ( Auto  Components ), हस्तशिल्प ( Handicrafts ), इलेक्ट्रॉनिक्स( Electronics ), रियल एस्टेट ( Real Estate ),जेम्स  एवं ज्वेलरी ( Gems  & Jewelry), ब्रांडेड कपडे ( Branded Clothes ) और लक्ज़री गुड्स ( Luxury Goods )  जैसे बिज़नेस सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हुए है  और आने वाले 1-2 सालो में भी  इन सेक्टर्स  में तेजी आने की संभावना कम है ! 
                   

    जैसे हर विपति मैं कोई आशा , कोई उम्मीद  छुपी रहती है उसी तरह कोविड -19 की आपदा ने भी बिज़नेस और करियर क्षेत्र में  के लिए कुछ संभावनाओं को जन्म दिया है !
    यहाँ पर मैं आपको 5 ऐसी बिज़नेस  और करियर की संभावनाओं के बारे में बता रहा हूँ जो   कोविड  -19 के चलते भारत में  तेजी से उभर रही है।
1. Medical Equipments, Devices  and Accessories:
            कोविड -19 महामारी के चलते देश ही नही पूरे विश्व में चिकित्सा उपकरण (Medical Equipments) ,Devices ओर Accessories की मांग बहुत तेजी से बढ रही  है। स्टेशनरी वेन्टीलेटर्स (Stationary Ventilators), चलित  वेंटिलेटर्स (Mobile Ventilators ),थर्मल स्केनर्स (Thermal Scanners),हाज़मात सुइट्स(Hazmat Suits ),पीपीई  सुइट्स (Personal Protective Equipments), आइसोलेशन बेड्स (Isolation Beds),डिसइंफेक्शन टनल्स (Disinfection Tunnels),आदि उपकरण बड़ी संख्या में लगने वाले है । इस के अलावा सेनीटाइज़र्स (Sanitizes), हैंड ग्लव्स ( Hand Gloves ), बॉडी मास्क्स (Body Masks), फेस मास्क्स (Face Masks) ,कोविड  टेस्टिंग किट ( Kovid Testing Kitsकी मांग में  बेतहाशा वृद्धि हो रही है। टाटा एवं  महिन्द्रा जैसी ऑटो  कंपनियो ने वेन्टीलेटर्स बनाने का काम तेजी से शुरू कर दिया है वही पुणे की माय लैब्स  हर हफ्ते में  20 लाख टेस्टिंग किट्स बना रही है और तमिलनाडु के तिरुपुर में 200 कपडे बनाने वाली कंपनियों ने फेस मास्क और बॉडी मास्क के करीब 15000 करोड के आर्डर बुक कर लिए है !

   आने वाले समय में फेस  मास्क्स तो शायद हमारे परिधान का एक हिस्सा हो जाएगा और संभवतः महिलाओ के लिए रंगीन ओर डिज़ाइनर  मास्क का बड़ा मार्केट उभर  सकता है। 










भारतीय कंपनिया इन उत्पादों का निर्यात अमेरिका और यूरोप के मार्किट में भी कर सकती है !
2.Online Teachers/ Coaches/ Counselors :

              कोरोना लॉकडाउन  के चलते स्कूल  और ऑफिसेस बंद होने के कारण बच्चो को ई -लर्निंग  (E-learning ) ओर हर स्तर के कर्मचारियों को घर से काम  ( Work From Home )करने का मौका मिला। स्कूल्स की क्लासेज गूगल हैंगऑउट (Google Hangout), और ज़ूम एप्प  ( Zoom ) पर चल रही है । इस बात की पूरी संभावना है कि भारत में स्कूल आगे भी कुछ महीने के लिए बंद रहेंगे क्योंकि बच्चो को स्कूल में सोशल डिस्टन्सिंग का पालन करवाना संभव नहीं होगा! 

               बच्चों को घर पर ही रहकर पढ़ना होगा , इसके कारण  ऑनलाइन टीचर्स और एक्सपर्ट ट्रेनर्स की मांग में तेजी से वृद्धि होगी ! Byju’s , Vedantu  और Unacedamy    जैसे शिक्षा और कोचिंग ऍप्स  के सुब्स्क्रिप्शन्स में पिछले 2 महीनों मैं बेतहाशा वृद्धि हुई है।  इसके अलावा भी  कई टीचर्स , इंस्ट्रक्टर्स और ट्रेनर्स भी अपने यूट्यूब चैनेल द्वारा बच्चों को पढ़ा रहे है !आने वाले समय में कोटा और हैदराबाद  जैसे शहरों की ‘ कोचिंग फैक्टरीज ‘ को अपनी बिज़नेस रणनीति में कुछ बदलाव करना पड़े  और इन्हे भी पूर्णतया ऑनलाइन बिज़नेस मॉडल की तरफ जाना  पड़ सकता है !
     कोविड -19 के चलते बड़ी संख्या मे बिज़नेस बंद होने, कर्मचारियों के नौकरियां  जाने और तनख़्वाह के कम होने का ख़तरा है ! कई लोगों को अपनी लाइफ स्टाइल में पूरी तरह से बदलाव करना होगा ! परिवार के सदस्यों को भी अपनी प्राथमिकता बदलनी होगी ! दुर्भाग्य से  आर्थिक और सामाजिक दवाब के चलते लोगो को  तनाव (Hypertension) ,व्यग्रता (Anxiety), अनिद्रा (Insomnia) अवसाद  (Depression), व्यवहार में परिवर्तन (Behavioral Changes) जैसी मानसिक बीमारियों से जूझना  पड़  सकता है। इसके लिए मनोविज्ञानियों (Psychologist) और मनोचिकित्स्कों  (Psychiatrist )की मांग  बढ़ सकती है। पति-पत्नी के संबंधो को भी नए सिरे से परिभाषित करने की जरूरत होगी , उसके लिए मैरिज कॉउंसलर्स ( Marriage Counselors ) की भूमिका महत्वपूर्ण होगी !अपने आप को मानसिक रूप से मजबूत रखने के लिए लोग , योग और प्राणायाम के विशेषज्ञों की सेवाएं लेँगे ! महत्वपूर्ण  बात यह है की इन सब सेवाओं को ऑनलाइन भी प्रदान किया जा सकता है !

3.E- commerce and Online Business:
          कोरोना वायरस के कारण लोगों की ख़रीददारी करने के तरीके में कई बदलाव देखने को मिलेंगे ! ग्राहक , भीड़भाड़ वाली दुकानों पर  जाने से कतराएंगे और ऑनलाइन ही  शॉपिंग  करना पसंद करेंगे !यदि आपने अपने परंपरागत बिज़नेस में  चाहे वो किराना का  हो , कपडे का हो ,इलेक्ट्रॉनिक्स का हो या ज्वैलरी का हो, टेक्नोलॉजी  और  डिजिटल का उपयोग  नही किया तो यकीन मानिए आपका बिज़नेस में सफल होना, मुश्किल होगा। 
मेट्रो शहरों में ही नहीं , छोटे शहरो में भी ऑनलाइन शॉपिंग का चलन तेजी से बढ़ेगा ! आपको बिज़नेस का हाइब्रिड मॉडल ( Hybrid Model )तैयार करना पड़ेगा जिसमे  ऑफलाइन और ऑनलाइन बिज़नेस का समावेश हो !

4. Website, App Developers and Digital Entrepreneurs :

            आफिस, बिज़नेस, स्कूल्ज, कंसल्टिंग आदि के ऑनलाइन होने से बड़ी संख्या मे वेबसाइट्स ओर एप्प्स  बनाने के लिए  आईटी  प्रोफेशनल्स  की आवश्यकता होगी इसके अलावा डिजिटल टेक्नोलॉजी के विशेषज्ञ जिन्हें डिजिटल मार्केटिंग , वीडियो एडिटिंग, फोटोशॉप, कंटेंट राइटिंग ओर सोशल मीडिया मार्केटिंग का अच्छा ज्ञान  है , काफी मांग में रहेंगे।













 5. Agriculture and Rural Economy:

                            कोरोना वायरस एवं लॉकडाउन  के चलते लाखो  की संख्या में मजदूर और  कारीगर अपने अपने गॉंवो  में  चले गए है और उनके वापस शहरो में  आने की संभावना निकट भविष्य मैं नही है, और लगता है , लॉकडाउन हटने के बाद जो मज़दूर /कारीगर शहरो में रह गए है  वो भी  गांव चले जाये !आने वाले दिनों मैं नोकरी नही होने कारण कई प्रोफेसनल्स  को मेट्रो सिटी छोड़कर टियर -2  या टियर  -3 सिटी या अपने गाँव का रुख करना  पड़े।जो छात्र या प्रोफेशनल्स बाहर के देशों में पढ़ने या काम के लिए जाने वाले थे ,वो सिलसिला भी शायद कुछ सालों के  रूक सकता है ! । पढ़े-लिखे और अनुभवी  मानव संसाधन (Human Resource) के छोटे शहरों व गाँवों  में जाने से इन गाँवों  ओर शहरो की अर्थव्यवस्था  में सकारात्मक बदलाव  आने की संभावना है। यह प्रोफेशनल, कृषि  जैसे परंपरागत क्षेत्र में  आधुनिक टेक्नोलॉजी , मशीनीकरण ( Mechanization ), इनोवेशन ,आउट ऑफ़ बॉक्स सोच , नयी दिशा दे सकते है ! जैविक खेती ( Organic Farming ), फूलों की खेती ( Floriculture ),एक्सोटिक सब्ज़ियाँ ( Exotic Vegetables ) और औषधीय पोधो ( Herbs )का नया मार्केट  तलाश सकते है !

    बड़ी संख्या मे लोगो के शहरो से गाँवो  में  पलायन के चलते वहाँ  पर निर्माण कार्यो  में  भी तेजी हो सकती है और इसका सीधा फायदा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा ! 

     निसंदेह भारत की अर्थव्यवस्था को संभलने में वक्त लगेगा,  लेकिन दूसरे देशों की तुलना मे भारत की अर्थव्यवस्था  जल्दी संभल सकती है । चीन विश्व पटल पर अपनी  विश्वसनीयता खो चुका है, और कई देश चीन  निर्माण इकाइयों को निकालने का मन बना चुके है  यूरोप , युवा पीढ़ी  के अभाव  और  मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट के ज्यादा होने के कारण, नए निवेश को आकर्षित नहीं कर पा रहा है ! अमेरिकन काम करने के लिए इच्छुक  नही है! अगर भारत कोरोना संकट को बेहतर ढंग से नियंत्रण करने में सफल होता है तो भारत की साख में  यक़ीनन वृद्धि होगी !

भारत,  आज भी अंतराष्ट्रीय निवेश के लिए उपयुक्त देश है और भारतीय अपने बुद्धि कौशल और मेहनत के बल पर इस संकट को अवसर में बदलने में सक्षम है , जरूरत है धैर्य की , सकारत्मक सोच की और कुछ कर गुजरने के ज़ज़्बे की !

मैनेजमेंट मंत्रा : बिज़नेस  में नयी संभावनाओं का जल्दी पता लगाकर उनपर अमल करने के लिए कारगर रणनीति का बनाना आवश्यक है !
… और ये प्रेरणादायी गीत लिये , आनंद लीजिये और लम्बी लड़ाई लड़ने के लिए अपने आप को तैयार कीजिये !
आपके सुझाव और कमैंट्स की प्रतीक्षा है !
 Nitesh Kataria, is a writer, Motivational Speaker, Blog Writer and Marketing Professional based in Pune and can be reached at 9822912811 or niteshk3@yahoo.com

7 P’s of Marketing Mix ( Concluding Part )

7 P’s of Marketing Mix (Concluding Part)

         Every Brand or business wants to become a market leader for that, it needs to attract the maximum customers out there. To achieve the same, it needs to have an unbeatable marketing strategy. The Marketing Mix model helps marketers plan a solid product or service offering that hits all the right notes with the target audience.
       Marketing mix refers to the strategies or plan that a company formulates to increase awareness about its products or services. It is also known as the 4Ps of marketing- Product, Price, Place and Promotion since the marketing mix strategy is a mixture of these four elements. In case of a service, the marketing mix becomes 7Ps of Marketing with other three Ps being- Physical Evidence, People and Process.
           We have already covered Product, Price, Place and Promotion in my previous blog, We will cover remaining 3 P’s i.e. Process, People and Physical Evidence in this blog.





                                     

Process:

          This element of the marketing mix looks at the systems used to deliver the service. Imagine you walk into Burger King and order a Burger and you get it delivered within 2 minutes. You go to a bank and your account is opened in 30 minutes or whether you eat French fries in an outlet of Delhi or in Pune, taste will be the same. In all these cases companies have set up a standard process for products and services and employees have to work as per laid down process.

      One of the best examples of having consistent and effective process, is supply of Tiffin’s by Mumbai’s dabbawala.

Who are Dabbawala?:

    Dabbawala’ s are a group of men in Mumbai  who pick-up home-cooked food from your home and deliver it to your office before lunch time and then  deliver the empty tiffin back to your home on the same evening. 

Key Points:

  •    5000 odd dabbawalas deliver roughly  2,00,000 ‘home-cooked’ lunches each day. They collect Tiffins from suburbs home at around 10.30-11 O’clock in the morning, get these boxes delivered to customers in Mumbai during lunch time around 1-1.30 PM, Empty boxes are collected by 2.0-2.30 pm and these gets delivered back to suburbs homes by 3.30 to 4 PM. Each box changes hands at least 6 times in transit before it reaches customer, the same is the case in its return journey as an empty tiffin. Entre journey of the dabbawala is done on Cycle, trains and on foot.

  •  Most dabbawalas are semi-literate. Minimum Qualification of joining Dabbawala Association is 8 th class. To identify the particular box, a combination of alphabet and number is used as code which indicates names and addresses of customer. 

  • Each dabbawalla receives about 10-12000 per month, the same income,irrespective of age, experience and number of customers served. He is not an employee but an entrepreneur and an equal shareholder in the Dabbawallah Association.

  •      The organization has earned a six-sigma rating, which means 1 error in 6 million transactions. The dabbawalas claimed that in their 120 years of operation, they’ve erred once in 16 million transactions.  
  •  From IIM-A to Harvard, their impeccable management skills have been studied and analysed in top business schools around the world.
  • On his visit to India in November 2003, Prince Charles met the famed Dabbawalah at Churchgate station to felicitate them.



People:    
      Aside from the management team, there are people down the line who are responsible for coming up with the products and services of the company.  Companies should take time to hire people who have the competence and expertise in the particular industry they are operating in.  This is true for people in the entire organization, from the managers down to the ordinary workers.  Investing in high caliber people will allow businesses to come up with the best products and services for their target customers. Having these people represent the company will also give the company a positive image in the eyes of the consumers.  It goes without saying that such positive image attracts sales.
People who bring the product to the customers:
    These are the people who are supposed to know what the customers want and what the best way is for these customers to get what they want.  Marketing efforts are focused on generating leads and attracting prospects.  When the prospects are ready to buy, these people make sure that the products and services are accessible to them in the most convenient and affordable manner.  When these people fail in their responsibility, the company will not be able to build a substantial customer base to keep their business profitable.
People who talk to the customers:                    
                Companies no matter how big or small require customer service to support their products and services.  They should have the right kind of people manning their customer touch points.  For a lot of customers, this could actually make or break a deal.  Customers always want to be assured that they can talk to people who are willing and able to help them in case they have problems or concerns with the products they bought or the services they availed of.  Companies should ensure that they have customer-friendly people who are ready to serve their customers’ needs.
     

    Customer service people can actually serve as a differentiating factor versus other competitor companies.  There are products that serve the same purpose and are configured the same way.  Customers, in these cases, look for brands and companies that can offer them exceptional customer service.
Physical Evidence:
            The final P in a marketing mix stands for physical evidence and it refers to everything your customers see or hear when interacting with your business. This element of the marketing mix will distinguish a company from its competitors. Physical evidence can be used to charge a premium price for a service and establish a positive experience. For example if you walk into a restaurant you expect a clean and friendly environment, if the restaurant is smelly or dirty, customers are likely to walk out. This is before they have even received the service. Few things which can be considered as physical evidence:
Ambiance:
 The ambient conditions include temperature, color, smell and sound, music and noise. The ambiance is a package of these elements which consciously or subconsciously help you to experience the service. Ambiance can be diverse. The ambiance of a health spa is relaxing and calm, and the music and smells underpin this experience. The ambiance of a nightclub will be loud noise and bright lights which enhance this customer experience, obviously in a different way. The marketer needs to match the ambiance to the service that is being delivered.





Physical Design & Layout of Premises:

Design and layout are important as they need to make customer experience simple and straight forward. If customers struggle to find what they want they will go elsewhere
In case of a retail store:

  •       Store Premises should be clean
  •          Layout of the stores should easy to navigate.
  •          Design, lighting and furniture of the store should convey the image of the                   business.
  •          Eye catching displays and Sign boards.



Corporate image and identity are supported by signs, logo, symbols and artifacts of the business itself. These evidences are:
  •   Corporate Building or office (Interiors, Landscape, Furniture etc.)

  • ·Website design and App design



  •  Office Stationary like letter head, Invoices, Business cards

  •   Company logo or brand
  •  Catalogs and Brochures



  • ·Worker’s Uniform and Employee dress
 Management Mantra: 7 P’s of Marketing Mix are key elements in success of any business and one has to implement them carefully keeping in mind various factors.

Nitesh Kataria, is a writer, Motivational Speaker, Blog Writer and Marketing Professional based in Pune and can be reached at 9822912811 or niteshk3@yahoo.com.


























7 P’s of Marketing Mix ( Part – 1)

                   7 P’s of Marketing Mix

       Every Brand or business wants to become a market leader for that, it needs to attract the maximum customers out there. To achieve the same, it needs to have an unbeatable marketing strategy. The Marketing Mix model helps marketers plan a solid product or service offering that hits all the right notes with the target audience.

       Marketing mix refers to the strategies or plan that a company formulates to increase awareness about its products or services. It is also known as the 4P’s of marketing- Product, Price, Place and Promotion since the marketing mix strategy is a mixture of these four elements. In case of a service, the marketing mix becomes 7P’s of Marketing with other three P’s being- Physical Evidence, People and Process.





Product :
Anything that can be offered to a market for attention, acquisition, use or consumption that might satisfy a want or need. It includes physical objects, services, persons, places, organizations and ideas”. Kotler, Wong, Saunders, Armstrong.

There may be 4 different category of products

Tangible Products: 
These are touchable and physical items, a Mobile Handset, a Tooth-Paste, a laptop, a car are Example of tangible products.

Intangible Products: 
These are untouchable and non-physical items, but you can feel it, Mobile apps, Downloadable music

 Consumer Products
 These items are bought by end users for personal consumption, for     example, Food items, shirts, Motorbikes  etc.                    

 Industrial Products: 
  Those items bought for further processing or use in a business For  example, raw   material,machinery, and components.

 Services:
  The examples of services are Airlines, Multiplexes, Hospitals, Business   consulting and   Hotel Industry.

 Persons: 
 The examples are Sports Personalities, Politicians, Public Figures, Film or TV   personalities.

 Places: 
 Tourist Places like Taj Mahal, Statue of Unity, and Goa etc.

Organizations:  
NGO’s like CRY (Child Rights and You), Religious organization like ISKON etc.

Ideas: 
Marketplace business models like OYO Rooms, Swiggy, Ola etc. Introduction of 20-20 matches in cricket.
Price :

                Pricing is an extremely important component to your marketing mix as it determines your profit and costing of your product. Altering the price of a product can affect the entire marketing strategy, whilst also affecting the sales and demand of your product. Few of the pricing strategies are as below:



 1.Marketing Penetration Price:
    The price is set low in order to increase sales and market share. The goal is to attract new customers based on low price. Example Parle G biscuit.

  2. Marketing Skimming Price:
   The price is set high initially and is gradually lowered as the product moves through the product life cycle. This is applicable for technology or Electronic products.
 3.Psychological Pricing:
       The price is set just below a whole number in order to make the product and price more attractive for example keeping price as Rs.499 and Rs.999 and not as Rs.500 and Rs.1000.

 4.Premium Pricing:
   The manufacturer will set a high price. The price set will reflect the premium quality of the product. High End Watches like “Omega” or Fashion brands are examples of premium pricing.

 5. Bundle Pricing:
  In a bundle pricing, Companies sell a package or set of goods or services for a lower price than they would charge if the customer bought all of them separately. Common examples include value meals (Combo Offers) at restaurants.

6.Value Pricing:
Prices are set on products that reflect the value of the product. Price of the product is dependent on the perceived value of the products.

7. Captive Pricing:
With some products, you have to buy another item in order to use it. If we look at printers, you need to buy the Ink Cartridge in order to run that printer. Captive pricing is a clever strategy, usually the additional items that are needed will cost more.

8. Cost plus Pricing:
 The organisation puts a percentage profit on the cost of making the product. For example if   the production cost is Rs.100 and the mark up is 20% the selling price would be Rs.120.

9. Optional Pricing:
    A firm will charge extra for any optional products that are sold alongside the main product. Airlines generally keep the fair charges low but if a customer wants to opt for window seat, he will be charged extra.

10. Competitive Price:
      A firm looks at their competitors and decides to charge a premium price, an economy price or a mid-range price for their products, compared to their competitors.


Promotion:

In a marketing mix, promotion is an element that can boost sales and brand recognition through Personal Selling, advertising, sales promotion, Direct Marketing, Publicity etc.


Personal Selling:
            It is a part of the promotional mix which involves a one to one communication between buyers and customers (either potential or already customers). As it is a one-to-one communication, it generates direct contact with prospects and customers. Selling of Insurance policy or capital goods or machinery.

Advertising:
      One of the key factors in the promotional mix, which contributes to brand building and also how the market perceives the company, is advertising. It is always a big part of the promotional mix because of the far and wide reach of advertising and the message that you can send to your existing and potential customers. Good advertising can build a solid brand for the company. On the other hand, bad advertising with a wrong message, can cause the brand or product to fail.
       One of the great advertising success was Cadbury Dairy Milk Chocolate, In 1994 “Asli Sawd Zindagi Ka” ad that broke brand’s ‘ Kids –only’ image and positioned it as a product for Teenage and adult consumption. The iconic ad, which featured a young woman dancing on a cricket field with absolute abandon enjoying a bar of Cadbury Dairy Milk, remains one of the most memorable campaigns in Indian advertising.















Similarly “ Kuch Meetha Ho Jaye” ad series by Amitabh Bacchan for Cadbury Dairy Milk Chocolate, which positioned Chocolate as substitute for the traditional sweets during the festival seasons was also an iconic ad.

Advertisement in Print Media

Advertisement in Electronic Media like TV

Advertisement in Social Media like Facebook or Whatsup

Direct Marketing:

         While advertising targets a mass-audience, direct marketing targets prospects and customers. Mobile Messaging, Social media marketing, Email marketing, Internet marketing, are all types of direct marketing used by companies. Company’s employ direct marketing in order to engage in one-way communication with its customers, about product announcements, special promotions, order confirmations as well as customer inquiries
Sales Promotion:

Sales promotions are one of the most common types of promotion used by companies. Their main purpose is to stimulate sales of the product in short terms.  Examples include, Special Discount during festival season (Sabse Sasta Din, Big Billion Sale by E-Commerce companies), Free Gifts, Buy 2 get 3 offers, Special offer for Channel partners like free Dubai trip for the purchase of so much quantity.

Public Relations:

     Lastly, public relations enable an organization to influence a target audience and through this, create a favourable and positive image for the company. The company tries to connect with the audience by sharing information with them about the company and about the product.  Seminars, Exhibitions, Blog writing about the products, Press release in Magazines and Newspaper. By pledging 1500 Crores to fight against Corona Virus, Tata Group has generated a lot of positive image and that will be beneficial for the group in the long run.

Place (Distribution Strategy):


                    Place refers to distribution or the methods and location you use for your products or services to be easily accessible to the target customers. Your product or service dictates how it should be distributed. If you own a retail shop, for example, the distribution chain ends with you and you supply to your customers directly.
            If you are manufacturers, your options will be to either sell your products directly or sell them to retailers or dealers as your distribution Strategy. Distribution methods may include, door-to-door sales, retail channels, e-commerce, through exhibitions, Tele Marketing, Through Dealers, through Company owned showrooms, through Franchise etc.
Distribution strategy is dependent on the kind of product and the geography we want to cover for the distribution.

Management Mantra: 7 P’s of Marketing Mix are key factors in success of any business and one has to implement them carefully keeping in mind various factors

Nitesh Kataria, is a writer, Motivational Speaker, Blog Writer and Marketing Professional based in Pune and can be reached at 9822912811 or niteshk3@yahoo.com.


कोरोना लॉकडाउन में क्या नया सीखें??

                                            कोरोना लॉकडाउन में क्या नया सीखें ??

                    कोरोना वायरस ने पिछले 3 महीने से ज्यादा समय से विश्व भर में तबाही मचा रखी है ! दुनिया के लगभग 200 देशो में कोरोना से 1. 6  लाख से अधिक लोगो की मौत हो चुकी है और करीब 16  लाख से ज्यादा लोग इस वायरस से संक्रमित है ! अमेरिका, इटली , स्पेन, इंग्लैंड, फ्रांस , जर्मनी जैसे विकसित देशो ने भी  इस महामारी के आगे घुटने टेक दिए और वो समझ नहीं पा रहे है की इस आपदा से कैसे निपटा जाये ! भारत में भी कोरोना वायरस के कारण हालात बिगड़ते जा रहे है और 3 हफ्तों से ज्यादा लॉकडाउन की स्थिति  बनी हुई है और देश के 130 करोड लोग अपने घरो में रहने पर मजबूर है ! अभी की स्थिति को देखकर लगता  है की आने वाले  2-3 महीनो  में भी लॉकडाउन के पूरी  तरह  से हटने  की संभावना कम है   है ! बड़ा  सवाल यह है की इस ख़ाली  समय का उपयोग कैसे किया जाये , या तो हर दो घंटे में क्रिकेट स्कोर की तरह मरने वालो का आंकड़ा देखकर भयभीत होते रहे या इस समय का कोई नयी स्किल या हॉबी को विकसित कर  के पॉजिटिव  तरीके  से उपयोग किया  जाये !

      मैं  आपके लिए 6 सुझाव दे रहा हूँ, जो शायद आपके प्रोफेशनल  करियर या बिज़नेस या ज़िंदगी में उपयोगी हो सकते  है !

Youtube Video

1.अपनी स्किल्स को अपग्रेड करे ( Upgrade Your Skills ):

           अगर आप प्रोफेशनल है, किसी कंपनी में काम करते है या आपका अपना कोई स्टार्टअप बिज़नेस है, तो आपके लिए ये बेहतरीन अवसर है, अपनी स्किल सेट्स को विकसित करने का ! आज कई ऐसी वेब साइट्स और यूट्यूब चैनल्स है जिन्हे ज्वाइन करके आप छोटे छोटे  ( 2-3 सप्ताह )ऑनलाइन कोर्सेज बिना किसी मूल्य के या बहुत ही कम मूल्य पर कर सकते है ! Udemy , Coursera  और Upgrad  जैसी वेब साइट्स, ऑनलाइन कोर्सेज के लिए बहुत उपयोगी और यूजर फ्रेंडली है ! आप नीचे लिखे विषयों पर कोर्सेज कर सकते है :   

  

  
  •  Digital Marketing
  • Social Media Marketing
  • Search Engine Optimization
  •  Financial Ratios
  • Finance For Non -Finance People 
  • Project Management
  • Internet of Things ( IOT )
  • Advance Excel or Power Point Presentation
  •  Learning local or Foreign Language ( English ,German , French , Japanese etc )
     
             अगर आप छात्र है तो आप Mock Interviews , Personality Development , Group  Discussions की ऑनलाइन क्लासेज कर सकते है जो आपके करियर के लिए उपयोगी हो सकता है !

         अगर आप बिज़नेस कर रहे है, और आप की आयु 40-45  वर्ष से ऊपर है  और कंप्यूटर चलाना नहीं आता है, आप इसको चलाना सीख़ लीजिये, चाहे बेसिक ही सीख ले, आने वाले समय में बहुत काम आएगा ! कोरोना संकट के ख़त्म होने के बाद, टेक्नोलॉजी और डिजिटल का प्रयोग बहुत तेजी से बढ़ेगा !

2. नेटवर्किंग ( Networking ):

                                आप सोच रहे होंगे, लॉक डाउन  या घर में बैठ कर नेटवर्किंग कैसे संभव है ? आपको कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं है , अपना मोबाइल उठाइये और आपके जो भी पुराने मित्र है , जो स्कूल में साथ पढ़े हो, कॉलेज में साथ पढ़े हो या पुरानी कंपनी के साथी हो, बात कीजिये उनके हाल चाल जानिए ! अगर किसी से बोलचाल भी बंद है , या झगड़ा भी चल रहा है, उसे भी फ़ोन कीजिये ! आपको जादू की झप्पी देने की जरूरत नहीं है, आपको मोबाइल की घंटी देने की जरूरत है ! आशंकाओं और अनिश्चिताओ के दौर में, दोस्तों या परिचितों से बात करके सुकून प्राप्त कर सकते है ! ज़ूम ( Zoom) जैसे वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग अप्प, मोबाइल पर उपलब्ध है, जिनके  ज़रिये आप एक साथ कई दोस्तों से वीडिओ कॉल कर सकते हो ! अगर आप फेसबुक पर नहीं है तो मेरा सुझाव है आप फेसबुक ( Facebook ) पर अपना अकाउंट बनाइये, कई दोस्त और परिचित, फेसबुक पर मिलेंगे उनके साथ जुड़िये ! फेसबुक पर कुछ सकारात्मक विचार या सुचना लिखकर इस प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रह सकते है ! अगर आप प्रोफेशनल या तकनीकी और प्रबंधन के छात्र है तो मेरा सुझाव है आप लिंकेडीन (linkedin) पर अपना अकाउंट खोले और अपनी इंडस्ट्री या विषय से सम्बंधित प्रोफेशनल्स के साथ जुड़े ! लिंकेडीन के माध्यम से आप अपना प्रोफेशनल नेटवर्क बना सकते हो जो आपके करियर के लिए उपयोगी हो सकता है !







3.रीडिंग बुक्स ( Reading  Books ) :

             मोबाइल और टीवी के बढ़ते चलन के चलते, किताबे पढ़ने का रुझान ख़त्म हो गया है ! युवाओ की एक पूरी ,पीढ़ी गुजर चुकी है जिनका किताबो से कोई सरोकार नहीं रहा है ! लॉक डाउन में मिले समय को आप कुछ अच्छी किताबे पढ़कर बीता सकते है ! मेरी व्यक्तिगत राय के अनुसार आप इन महान व्यक्तित्वों के बारे में पढ़ सकते है :

                                                  
                                      
              रतन टाटा, अजीम प्रेमजी , धीरूभाई अम्बानी , घनश्याम दास और नारायण मूर्ति  इन के बारे में पढ़कर, आप बिज़नेस मैनेजमेंट  , लीडरशिप, आपदा प्रबंधनसकारत्मक दृष्टिकोण सीख सकते है! इसके अलावा छत्रपति शिवाजी, महाराणा प्रताप और चाणक्य जैसे योद्धाओ का चरित्र चित्रण  भी पढ़ सकते है और उनसे देश प्रेम, नैतिक मूल्य और नीति शास्त्र के बारे में प्रेरणा ले सकते है ! डॉ अब्दुल कलाम, महात्मा गाँधी और विवेकानंद जैसे महापुरुषों के बारे में भी पढ़ सकते है !

                                              

                 
   


4. यूट्यूब चैनल लॉन्चिंग ( You Tube Channel  Launching ):

               यदि आप राजनीती, धर्म, इतिहास, खेलकूद, बिज़नेस, टेक्नोलॉजी , इलेक्ट्रॉनिक्स, कुकिंग , योग, विज्ञान, मैनेजमेंट, टूरिज्म  आदि विषयो की अच्छी जानकारी है तो आप अपना यूट्यूब पर चैनल बनाकर छोटे छोटे वीडियो डाल सकते है ! यही नहीं अगर आप अच्छा गाना गा  सकते हो, या डांस कर सकते हो या कॉमेडी कर सकते हो , तो आप के लिए मौका है यूट्यूब पर वीडियो बनाकर शेयर करने काअगर आप के पास gmail अकाउंट है तो बड़ी आसानी से यूट्यूब चैनल बना सकते है, नहीं है तो पहले gmail अकाउंट खोलना होगा और उसके बाद यूट्यूब चैनल बना सकते है !

इस  प्लेटफॉर्म के माध्यम से केवल आप अपना समय, अच्छे से व्यतीत कर पाएंगे बल्कि भविष्य में आपके लिए ये आमदनी का जरिया भी बन सकता है !


5. कुकिंग स्किल्स ( Cooking Skills )

                कोरोना लॉकडाउन के चलते हुए रेस्टॉरेंट्स बंद है , टिफ़िन सेंटर्स बंद है , बड़े शहरों में जहाँ पर लोगो की निर्भरता स्विग्गी ( Swiggy ) और जोमाटो ( Zomato ) जैसे मोबाइल अप्प जो 24  घंटे खाने की डिलीवरी करते है, अभी बंद है ! मेरा अनुरोध है , इस ख़ाली मिले समय में आप खाना बनाना सीखें, यह बात ज्यादा उन युवा लड़कियों या महिलाओं के लिए है जिन्हे खाना बनाने में कोई रुझान नहीं है ! पुरुष वर्ग भी अपने हाथ आजमा सकता है , कोई हानि नहीं है !आप खाने की बेसिक ट्रेनिंग ले सकती है, रोटी, सब्जी , चाय और चावल बनाना भी सीख लिया है तो काम चल जायेगा ! अगर बेसिक खाना बनाना आता है तो आप दूसरी तरह की डिशेस यूट्यूब वीडियो के माध्यम से सीख सकती है ! यकीन मानिये , रेस्टॉरेंट्स लॉक डाउन, में सब से बाद में खुलेंगे और खुल भी गए तो कोरोना वायरस के डर से लोग वहाँ जाना पसंद नहीं करेंगे !


6. अपने आप में निवेश ( Invest in yourself ):

             इस कोरोना आपदा से निपटने के लिए सबसे अच्छा सुझाव है ,आप अपने आप पर निवेश करे ! इस कठिन समय में केवल आपको शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने की ज़रुरत है बल्कि मानसिक रूप से भी मज़बूत रहने की आवश्यकता है ! देश ही नहीं विश्व की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो गयी है ! आने वाले समय में कोनसा बिज़नेस चलेगा, कोनसा नहीं कोई भी बताने की स्थिति में नहीं है !



                         बड़ी संख्या में  बिज़नेस बंद होने और नौकरियाँ  जाने का खतरा है, लेकिन इन सब से लड़ने के लिए अपने आप को तैयार रखना बहुत ज़रूरी है  इस ख़ाली समय में आप प्राणायाम कीजिये, योगा कीजिये, व्यायाम कीजिये और अपने आप को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखिये ! अगर लॉक डाउन के दौरान जिन लोगो की शराब , सिगरेट , तम्बाखू , गुटखा खाने की आदत छूट गयी हो तो कृपया लॉक डाउन खुलने के बाद भी बंद ही रहने दे ! आपको स्वास्थ्य लाभ तो होगा ही आर्थिक रूप से भी फायदे में    इस समय में आप अपनी हॉबी पर काम कर सकते हो, आपको चित्रकारी या पेंटिंग या संगीत या डांस या कहानीकविताशायरी में रूचि है, आप वो कीजिये और अपनी प्रतिभा को निखारने  पर काम  किया जाये !

               ऊपर दिए गए सुझाव मेरा व्यक्तिगत विचार है और मेरे अनुभव और विभिन्न लोगो से बातचीत पर आधारित है ! इन्हे मानने की कोई बाध्यता नहीं है !

मैनेजमेंट मंत्र : परिवर्तन ही जीवन का नियम है, हालाँकि अभी जो परिवर्तन हो रहा है वो पिछले  100सालों  में देखने को नहीं मिला है! नयी स्किल्स सीखिए, अपने आप को अपडेट रखिये ! सकारत्मक सोच से बहुत कुछ बदला जा सकता है !

Nitesh Kataria,  is a writer, Motivational Speaker, Blog Writer and Marketing Professional based in Pune and  can be reached  at 9822912811  or  niteshk3@yahoo.com.




मारवाड़ी बिज़नेस के 7 मूलमंत्र

                                                 मारवाड़ी बिज़नेस के  7  मूलमंत्र 

                 हिंदुस्तान में बिज़नेस का नाम आते ही लोगो के जेहन में सबसे पहला शब्द आता है ” मारवाड़ी “। अपनी अद्भुत व्यापारिक समझबूझ , कुशल व्यवहार, कठिन परिश्रम, स्व -अनुशासन और नेतृत्व क्षमता के चलते देश के व्यापार और उद्योग जगत में मारवाड़ी लोगो ने अपना  एक विशिष्ट स्थान  स्थापित किया है ! बिरला, मित्तल, बजाज, गोयनका, बांगर , अग्रवाल , सिंघानिया ,बियानी ,पोद्दार ,डालमिया ,रूइआ,ओसवाल ,पीरामल,मोरारका,जिंदल,मोदी,सोमानी,जैन, खेतान, सक्सेरिया, कासलीवाल  आदि मारवाड़ी परिवारों की लम्बी फेहरिस्त है, जिन्होंने अपने बिज़नेस में नए आयामो को छुआ है ! मारवाड़ी व्यापारियों ने न केवल परंपरागत बिज़नेस जैसे कपास ,मेटल,  सीमेंट,   केमिकल्स,   खाद,  पेपर, चाय , जूट  आदि में अपना अधिपत्य स्थापित किया है, बल्कि इन परिवारों की युवा पीढ़ी ने इ- कॉमर्स और टेक्नोलॉजी से सम्बंधित कंपनियों की सफलतापूर्वक  स्थापना कर के ये साबित कर दिया है की नयी किस्म की बिज़नेस में भी मारवाड़ियों का कोई सानी नहीं है !



कौन है मारवाड़ी ??

          मारवाड़ी शब्द  की उत्पत्ति संस्कृत के शब्द ‘मरुवत’ से हुई है, मरू का मतलब है रेगिस्तान ! मारवाड़ी लोग, राजस्थान के दक्षिण-पश्चिम भाग से जिसे शेखावाटी भी कहते है, से निकल कर देश के विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचे थे ! राजस्थान के चूरू, झुंझुनू, बीकानेर, जोधपुर, सीकर , जैसलमेर आदि जिलों में  हमेशा अकाल का साया रहता था और कृषि या दूसरे व्यापार -धंधे की संभावनाएं लगभग नहीं होने के कारण, मारवाड़ी लोगो ने समय समय पर अपने क्षेत्र से पलायन करके देश के दूसरे हिस्सों में अपना ठिकाना बनाया !

                         मारवाड़ी लोगो में मुख्यता माहेश्वरी , जैन, खंडेलवाल, अग्रवाल जिन्हे बनिया भी कहा जाता है, ने  कोलकाता , कानपूर, दिल्ली, चेन्नई, मुंबई , नागपुर, रायपुर, इंदौर बैंगलोर, चेन्नई, गौहाटी   आदि शहरो में  जाकर , कठिन परिस्तिथियों में  अपने संघर्ष गाथा  की शुरुआत की ! मुग़ल बादशाह अकबर के दौर में वर्ष  1564 में सबसे पहले कुछ लोगो ने  पलायन करके बंगाल में बसने की शुरुआत की थी और बाद में ये सिलसिला जारी रहा !

क्या है सफलता के मूलमंत्र ?


                                              VIDEO ON YOU TUBE CHANNEL 

                            आखिर वो क्या वजहें है की पिछले लगभग 200  सालो से मारवाड़ी परिवारों का बिज़नेस में दबदबा रहा तथा  उदारीकरण और वैश्वीकरण की आंधी में भी अपने बिज़नेस पर मज़बूत पकड़ बनायें रखीं है ? यहाँ बिज़नेस के 7  मूल मंत्र प्रस्तुत है, जिसके बलबूते मारवाड़ी अपना बिज़नेस साम्राज्य खड़ा करने में सफल हुए !

1.पैसे और निवेश का सही प्रबंधन:मारवाड़ी बिज़नेस के सफल होने का प्रमुख कारण है , पैसे और निवेश का सही प्रबंधन। परिवार के मुखिया का पूरा नियंत्रण  व्यापार में होने वाले खर्चे, लागत और  मुनाफे पर होता है ! परिवार के मुखिया की अनुमति के बिना कोई भी वित्तीय फैसला लेना मुमकिन नहीं होता है ! मितव्यता और वित्तीय अनुशासन, किसी भी बिज़नेस की सफलता के केंद्र बिंदु है ! मारवाड़ी न केवल अपने एक एक पैसे का हिसाब रखते है बल्कि  व्यापार में होने वाले खर्चे को कम करने का पूरा ध्यान रखते है ! 



             मारवाड़ी परिवारों की यही खूबी, उन्हें कठिन बिज़नेस परिस्थितियों में भी लम्बे समय तक लड़ने का सामर्थ्य प्रदान करती है ! कम शिक्षित होने के बावजूद मारवाड़ी ,हिसाब के मामले में बहुत कुशल है  है और “पहले लिख, पीछे दे, भूल पड़े कागज़ से ले “ की निति पर काम करते है !


2.छोटे स्तर से शुरुआत:    मारवाड़ी लोग सामान्यतया चकाचोंध से दूर रहते हुए अपने बिज़नेस को बहुत छोटे से शुरू करने में सोचते नहीं है  ! कम पूंजी और संसाधन का अभाव भी मारवाड़ी लोगो के बिज़नेस के  ज़ज़्बे को रोक नहीं सकते है ! छोटे से बिज़नेस की शुरुआत  करके अपनी मेहनत और लगन से उसको आगे बढ़ाते है ! 





आज जहाँ मॉल और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के रिटेल स्टोर्स अपने बिज़नेस को  बढाने  में संघर्ष कर रहे है, वहीं मारवाड़ी किराना स्टोर्स अपनी बेहतरीन सेवाएं देकर अपने बिज़नेस का तेजी से विस्तार कर रहे है ! मारवाड़ी लोग अपना सारा ध्यान बिज़नेस के ऊपर केंद्रित रखते है !

.विपरीत परिस्तिथियों में सामंजस्य   : मारवाड़ी लोगो का एक सबसे बड़ा गुण है, परिस्थितियों और माहौल  के हिसाब से अपने आप को ढालना ! राजस्थान के छोटे गावों और शहरो से निकलकर मारवाड़ी देश के हर कोने तक पहुंचे और वहां अनजान लोगो और विपरीत वातावरण में अपने व्यापार की शुरूआत की ! 

               नयी जगहों पर जाकर मारवाड़ियों ने अपने मधुर व्यवहार से स्थानीय लोगो के बीच अपनी जगह बनायीं और  स्थानीय भाषा, तौर तरीके और जीवन शैली अपनायी ! चेन्नई और बैंगलोर में जाकर मारवाड़ी उतनी ही धाराप्रवाह तमिल और कन्नड़ बोलते है, जितनी की स्थानीय लोग ! शांत स्वभाव, धार्मिक संस्कारो और साधारण जीवन शैली के चलते, मारवाड़ी प्रायः किसी भी तरह के विवाद से भी बचते है !


4.जीवन मूल्यों की शिक्षा : मारवाड़ी परिवारों में बचपन से ही  व्यापार की शिक्षा के साथ साथ जीवन मूल्यों और संस्कार की शिक्षा देने का चलन रहा है ! व्यापार में विश्वश्नीयता, नैतिकता, मितव्यता, धैर्य, मेहनत  और टीम वर्क के महत्व का प्रशिक्षण दिया जाता है ! बचपन से ही पैसे की महत्ता को समझाया जाता है !



                       
श्री घनश्यामदास बिरला ने अपने पुत्र श्री बसंत कुमार बिरला के नाम जो पत्र लिखा था वो सब लोगो को पढ़ना चाहिए, वो अपने पुत्र को लिखते है की “धन का कभी मौज-शौक में उपयोग मत करना , ऐसा नहीं की धन हर समय साथ रहेगा ही,इसीलिए जितने दिन पास में  है उसका उपयोग सेवा के लिए करो , अपने ऊपर कम से कम खर्च  करो ,बाकी  जनकल्याण और दुखियो के  दुःख दूर करने में व्यय करो !”

5. संयुक्त परिवार की परंपरा : मारवाड़ी परिवारों में सामान्य तौर में संयुक्त परिवारों में रहने की परंपरा रही है ! आज के दौर में शायद संयुक्त परिवारों की संख्या  घट रही हो किन्तु पहले घर में  25-30  सदस्यों का एक साथ रहना और एक ही रसोई में भोजन बनाना, सामान्य बात थी ! 


                
       घर के मुखिया की अनुमति के बिना कोई भी फैसला लेना मुमकिन नहीं था  घर के हर सदस्य को खर्चे का हिसाब देना जरूरी होता था ! परिवार के हर  पुरुष सदस्यों को व्यापार -धंधे में अपना पूरा समय देना पड़ता है ! बड़ों को सम्मान देने की परम्परा है और मारवाड़ी उद्योगपति को बोर्ड मीटिंग में भी अपने से बुजुर्ग के पांव छूते हुए देखा जा सकता है ! अपने यहाँ  काम करने वाले कर्मचारियों को भी परिवार के सदस्यों की तरह ही रखा जाता है!


6 राष्ट्र प्रेम का जज़्बा :  मारवाड़ी धनाढ्यों ने जहाँ अपनी मेहनत, बुद्धि-कौशल और विवेक से धन अर्जित किया है और जब भी देश को धन की जरूरत हुई है तो अपने ख़ज़ाने ख़ाली करने में किसी भी तरह का सोच विचार नही किया !









                                 


                                                                        
                                                                                                                            
उद्योगपति श्री घनश्याम दास बिरला और श्री जमनालाल बजाज का भारत की स्वत्रंतता आंदोलन में योगदान किसी से छुपा हुआ नहीं है ! श्री जमनालाल बजाज ने नागपुर के पास वर्धा में अपनी ज़मीन महात्मा गाँधी को सौंप दी और वहाँ पर सेवाग्राम बनाया गया जो भारत की स्वंत्रता संग्राम का केंद्र बिंदू रहा ! श्री रामनाथ गोयनका, श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार, श्री अमरचंद बांठिया, श्री गुर्जरमल मोदी  का देश की स्वत्रंता में सराहनीय योगदान रहा है !
7.सामाजिक सरोकार:  मारवाड़ी समुदाय अपने पैसे को समाजोपयोगी कार्यो  में खर्च करने के लिए जानी जाती  है ! खुद के सिमित शिक्षित होने के बावजूद मारवाड़ियों ने देश में  उच्च शिक्षा और तकनीक  के कई विश्व स्तरीय संस्थान खोले । बिरला  इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी , पिलानी  ( बिरला परिवार ), गोविंदराम सक्सेरिया इंस्टिट्यूट ऑफ़  टेक्नोलॉजी एंड साइंस, इंदौर ( सक्सेरिया परिवार), एम् बी एम् इंजीनियरिंग कॉलेज, जोधपुर  ( बांगर परिवार  ), विद्या भवन, उदयपुर ( सक्सेरिया परिवार ), जमनालाल बजाज इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट, मुंबई ( बजाज परिवार  ), अशोक हॉल, कोलकाता (बिरला परिवार )  आदि संस्थान अपनी  बेहतरीन शिक्षा प्रणाली के लिए विख्यात है ! 



एम्. बी. एम्. इंजीनियरिंग कॉलेज,जोधपुर                     

                                                                                                                                                                               
                      शिक्षा संस्थानों के अलावा  मारवाड़ियों द्वारा बनायीं गयी धर्मशालाएँ, मंदिर और सामुदायिक भवन देश के लगभग हर शहर में मौजूद है और समाज के हर वर्ग के उपयोग के  लिए उपलब्ध है ! देश में जब भी कोई बाढ़, भूकंप , अकाल जैसी आपदा आई है , मारवाड़ियों ने समय- समय पर तन-मन-धन से अपना योगदान दिया है !


कुछ प्रसिद्ध  मारवाड़ी कंपनिया:








बजाज ग्रुप (बजाज ऑटो ,बजाज फिनसर्व , बजाज इलेक्ट्रिकल्स )











आर्सेलर मित्तल स्टील ग्रुप  ( मित्तल स्टील, इस्पात इंडस्ट्रीज )







वेदांता रिसोर्सेस लिमिटेड:  ( कैर्न एनर्जी, हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड, भारत एल्युमीनियम कंपनी, स्टरलाइट इंडस्ट्रीज  )








दमानी ग्रुप:  ( डी-मार्ट – श्री राधाकृष्ण दमानी, फोर्बेस मैगज़ीन के हिसाब से भारत के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति है !)










आदित्य बिरला ग्रुप : ( हिंडालको, आदित्य सीमेंट,  इंडो-गल्फ फर्टीलिज़ेर्स, बिरला कॉपर, ग्रासिम इंडस्ट्रीज, अल्ट्रा टेक सीमेंट , आईडिया सेलुलर )
















बांगर ग्रुप :( श्री सीमेंट, बांगर सीमेंट  )











सिंघानिया ग्रुप : ( जे के सीमेंट , रेमंड्स , जे के टायर्स, जे के पेपर  )

फ्यूचर रिटेल: ( बिग बाजार , पेंटालून रिटेल )








पीरामल ग्रुप: ( पीरामल इंटरप्राइजेज, पीरामल ग्लास, पीरामल रियलिटी )















गोयनका ग्रुप ( सीऐट टायर्स, आरपीजी लाइफ साइंसेज, केइसी इंटरनेशनल , जेनसार टेक्नोलॉजी, वेलस्पन टेक्सटाइल )









सोमानी ग्रुप: ( थायसेनक्रूप,  उधे इंडिया )









खेतान ग्रुप : (मेक्नाली भारत , रेडिको खेतान )













जिंदल ग्रुप 😦 JSW एनर्जी, जिंदल स्टील एंड पावर )












पोद्दार ग्रुप 😦 चम्बल फर्टिलाइज़र्स  , बालकृष्ण टायर्स, जुआरी एग्रो, सियाराम सिल्क्स  )










डालमिया ग्रुप 😦 गुजरात हैवी केमिकल्स लिमिटेड, डालमिया सीमेंट )




प्रसिद्ध मारवाड़ी  ई -कॉमर्स एवं टेक्नोलॉजी कंपनी :










रोहित बंसल एवं बिन्नी बंसल ( फ्लिपकार्ट )









रितेश अग्रवाल ( ओयो होटल्स )










भाविश अग्रवाल (ओला कैब्स )












पीयूष बंसल (लेंसकार्ट )














दीपेंदर  गोयल ( जोमेटो )

आशीष गोयल (अर्बन लैडर )


मैनेजमेंट मंत्र : अनुशासन , रिस्क लेने की क्षमता और कठिन परिश्रम के बिना बिज़नेस में सफलता पाना असंभव है ! मारवाड़ी बिज़नेस लीडर्स के जीवन से बहुत कुछ सीखा जा सकता है और उसे अपने बिज़नेस में लागु कर सकते है ! आप सब  गीता पीरामल की पुस्तक ” बिज़नेस महाराजा” पढ़ सकते है, जिसमे 8  बिज़नेस व्यक्तित्व का प्रोफाइल दिया गया है !


नितेश कटारिया, पुणे : लेखक,  मोटिवेशनल स्पीकर, ब्लॉग राइटर और मार्केटिंग प्रोफेशनल है और 9822912811  या niteshk3@yahoo.com  पर पंहुचा जा सकता है !